गुलिक काल
गुलिक काल शनि-पुत्र गुलिक (मांदी) के अधीन दिन का आठवाँ भाग है, वार से तय। इसमें आरंभ किया कार्य दोहराता है, ऐसा माना जाता है, इसलिए अधिकतर कार्यों में वर्ज्य।
गणना
सूर्योदय-सूर्यास्त के समय को आठ भागों में बाँटें। गुलिक काल रविवार को सातवाँ, सोमवार को छठा, मंगलवार को पाँचवाँ, बुधवार को चौथा, गुरुवार को तीसरा, शुक्रवार को दूसरा और शनिवार को पहला है। सूर्यास्त से गिना जाने वाला रात्रि गुलिक भी है।
व्यवहार में
कहावत है कि गुलिक काल में किया कार्य फिर होता है, इसलिए जो न दोहराना चाहें — अंतिम संस्कार, ऋण, रोग-उपचार — उसमें टाला जाता है। इसी तर्क से कुछ परंपराएँ दोहराने योग्य कार्य इसमें जानकर करती हैं। केरल में कुंडली के लिए मांदी की सटीक स्थिति निकाली जाती है।
FAQ
क्या Hastro के मुहूर्त में गुलिक काल लागू है?
केवल वहाँ जहाँ कार्य का नियम कहे। पंचांग पृष्ठ पर दैनिक अवधि हर हाल में दिखती है।