करण
करण आधी तिथि है — वह समय जिसमें चंद्रमा सूर्य से 6° आगे बढ़ता है। ग्यारह करण हैं; विष्टि, जिसे भद्रा कहते हैं, वर्ज्य है।
करण क्या है
हर तिथि के दो करण होते हैं, हर आधे में एक, इसलिए चांद्र मास में साठ करण होते हैं। सात करण मास में चक्र में घूमते हैं: बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज और विष्टि। चार स्थिर करण अमावस्या के आसपास एक-एक बार आते हैं: शकुनि, चतुष्पद, नाग और किंस्तुघ्न।
भद्रा
विष्टि करण ही भद्रा है। परंपरा कहती है कि भद्रा में कोई शुभ कार्य, विशेषकर राखी बाँधना या यात्रा आरंभ, नहीं करना चाहिए। Hastro हर दिन की भद्रा अवधि पंचांग पर दिखाता है और मुहूर्त अंकों में उसे घटाता है। जब रक्षाबंधन की पूरी दोपहर भद्रा में हो, तो पर्व अगली सुबह चला जाता है यदि पूर्णिमा सूर्योदय पर हो — इसी कारण 2025 में रक्षाबंधन 9 अगस्त को था।
FAQ
करण कितना लंबा होता है?
लगभग आधी तिथि: औसतन बारह घंटे से कुछ कम, लगभग 9 से 13 घंटे।
भद्रा का निवास क्या है?
पंचांग चंद्रमा की राशि से भद्रा को मृत्युलोक (पृथ्वी) की, स्वर्ग की या पाताल की बताते हैं; पृथ्वी की भद्रा ही वर्ज्य है। Hastro हर विष्टि अवधि सूचीबद्ध करता है; निवास का सूक्ष्म नियम आप स्वयं लगा सकते हैं।
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