गंडमूल नक्षत्र
गंडमूल राशिचक्र की संधियों के छह नक्षत्र हैं: अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती। इनमें जन्म हो तो परंपरा मूल शांति की अपेक्षा रखती है।
कौन से नक्षत्र
ये छह वहाँ हैं जहाँ जल राशि अग्नि राशि से मिलती है: आश्लेषा–मघा, ज्येष्ठा–मूल और रेवती–अश्विनी। हर एक का स्वामी बुध या केतु है। चंद्रमा इनके भीतर राशि-सीमा पार करता है, इसलिए ये गंड (संधि) मूल (जड़) नक्षत्र कहलाते हैं।
गंडमूल में जन्म
जिस बच्चे का चंद्र इनमें हो वह गंडमूल में जन्मा कहलाता है और शांति पूजा की जाती है, पारंपरिक रूप से 27 दिन बाद जब चंद्र उसी नक्षत्र में लौटे। तीव्रता चरण से आँकी जाती है; कुछ चरण निर्दोष माने जाते हैं।
पंचांग में
Hastro हर दिन की गंडमूल अवधि चिह्नित करता है। मुंडन और नामकरण के मुहूर्त नियम इन्हें घटाते हैं; अन्य कार्य इन्हें नहीं देखते।
FAQ
कैसे जानें कि बच्चे का जन्म गंडमूल में हुआ?
कुंडली टैब में जन्म-विवरण भरें और चंद्र का नक्षत्र देखें। छह में से हो तो कुंडली इसे नोट करती है।
मूल शांति कब होती है?
सामान्यतः जन्म के 27वें दिन जब चंद्र जन्म नक्षत्र में लौटे, या बाद में उसी नक्षत्र के किसी दिन।
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